SSB Empowers Women: Three Appointed as Dog Squad Handlers । एसएसबी ने श्वान दस्ते (Dog quad) को संभालने के लिए तीन महिलाओं को नियुक्त किया

SSB Empowers Women: Three Appointed as Dog Squad Handlers
SSB Empowers Women: Three Appointed as Dog Squad Handlers

SSB Empowers Women: Three Appointed as Dog Squad Handlers

जवान टाइम्स: लखनऊ, जेंडर इक्वॉलिटी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने अपने श्वान दस्ते को संभालने के लिए तीन महिलाओं को नियुक्त किया है। कल्पनाबेन मनुभाई (24), आंचल रानी (23) और नेहा सोंकर (22) ने सख्त छह महीने की प्रशिक्षण योजना पूरी की है और अब वे नानपारा (बहराइच) के 42वें बटालियन में तैनात हैं।

एसएसबी के लखनऊ हेडक्वार्टर के कमांडेंट, ए.के. सिन्हा ने इस ऐतिहासिक निर्णय पर गर्व व्यक्त किया, “यह पहली बार है जब किसी बल ने महिलाओं को श्वान दस्ते को संभालने की जिम्मेदारी दी है। इससे केंद्रीय बलों में जेंडर इक्वॉल और SSB Women Empowerment के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।”

सिन्हा ने विशेष रूप से प्रशिक्षित स्निफर कुत्तों के क्रियात्मक भूमिका को महत्वपूर्ण बताया, जो विभिन्न वस्तुओं जैसे कि ड्रग्स, विस्फोटक और रक्त इत्यादि का पता लगाने में मदद करते हैं। उन्होंने इन भूमिकाओं के लिए महिलाओं को मंजूरी देने का निर्णय लेने की बात की, उनकी उदारता को महसूस करते हूए। सिन्हा जी ने बताया कि “कुत्ते मासूमों की तरह होते हैं। आपको उनके साथ एक संबंध बनाना होता है। आप उन्हें डाँटते हैं, और वे गुस्सा हो जाते हैं। यह प्रेम और स्नेह है जो उन्हें अच्छी प्रदर्शन करने में मदद करता है।”

गुजरात के राजकोट से आई कल्पनाबेन ने अपनी यात्रा साझा की, की “जब मैंने डॉग हैंडलिंग करने का निर्णय लिया, तो लोगों ने कहा कि यह पुरुषों का काम है और एक महिला के लिए नहीं है। फिर भी, मैंने आगे बढ़ने और इस सोच को बदलने का निर्णय लिया। मैं काम करते समय इस कार्य को इंजॉय करती हूँ। मुझे अलवार के श्वान प्रशिक्षण और प्रजनन केंद्र में मेरा प्रशिक्षण बहुत पसंद आया।”

बिहार से आई आंचल रानी, एक श्वान के प्रशंसक, ने मौका ग्रहण करते हुए कहा, “महिलाएं सभी क्षेत्रों में अविश्वसनीय प्रगति कर चुकी हैं। जब मैंने एसएसबी में शामिल होने का निर्णय लिया, तो मुझे पता चला कि कोई भी महिला, डॉग स्क्वॉड का हैंडलर नहीं था। कुत्ते प्रशिक्षण में आने का मौका मिलते ही मैंने उसमें शामिल होने का निश्चय किया।”

उत्तराखंड से हैं नेहा ने अपने कार्य में सशक्त महसूस करते हुए कहा, “मुझे बहुत ही सशक्त महसूस हो रहा है और मैं अपने कार्य को पसंद करती हूँ।”

एसएसबी द्वारा किया गया यह कदम न केवल जेंडर इक्वॉलिटी की ओर एक कदम है, बल्कि यह पुरुषों द्वारा परंपरागत रूप से अधिकतम होने वाली भूमिकाओं में महिलाओं की क्षमताओं को आगे बड़ने का मौक़ा देता है। इन तीनों की नियुक्ति यह दर्शाता है कि सशस्त्र सीमा बल में समावेशीता और समरसता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

जय हिन्द।

– जवान टाइम्स

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